केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग (Pay Commission) को मंजूरी दी है, जो केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनधारकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। इससे कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू हुई थीं।
कैसे बदलेंगे वेतन और पेंशन के स्वरूप?
8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 2.57 से बढ़ाकर 2.86 किए जाने की संभावना है। इसका सीधा प्रभाव कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन पर पड़ेगा। यदि यह संशोधन लागू होता है, तो केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर 51,480 रुपये तक हो सकती है। इससे पेंशनधारकों की पेंशन भी मौजूदा 9,000 रुपये से बढ़कर 22,500 रुपये से 25,200 रुपये के बीच हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर और संभावित बदलाव
फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी से केंद्र सरकार के वेतन संरचना में करीब 186 प्रतिशत का सुधार हो सकता है। इससे कर्मचारियों को न केवल उनकी बेसिक सैलरी में वृद्धि का लाभ मिलेगा, बल्कि अन्य भत्तों में भी सुधार होगा।
7वें वेतन आयोग के दौरान बदलाव
- फिटमेंट फैक्टर: 2.57
- मिनिमम बेसिक सैलरी: 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये
- मिनिमम पेंशन: 2,500 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये
अब 8वें वेतन आयोग में इन आंकड़ों के दोगुने से अधिक वृद्धि की संभावना है।
हर 10 साल में गठित होता है नया वेतन आयोग
केंद्र सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है ताकि अपने कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बेहतर वित्तीय समाधान पेश कर सके। 8वें वेतन आयोग के अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।
राज्य सरकारें भी केंद्रीय वेतन आयोग के आधार पर अपने कर्मचारियों के वेतन में बदलाव करती हैं।
पेंशनधारकों को कितना फायदा होगा?
यदि प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर को 2.86 तक बढ़ाया जाता है, तो पेंशनधारकों को भी अन्य लाभों के साथ पेंशन स्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर वृद्धि मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि मौजूदा पेंशन 9,000 रुपये है, तो यह 22,500 रुपये से 25,200 रुपये तक जा सकती है।